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shiv tandav stotra

Lord Shiva




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om ganapataye namo - Prayer to Lord Shiva | ॐ नमः शिवाय

Lord Shiva





ॐ नमः शिवाय | om namah shivaya - sanskrit


    By:   santosh |     Category :   Shiva |     Last updated :   19 December 2016


जटा टवी गलज्जल प्रवाह पावितस्थले, गलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजङ्ग तुङ्ग मालिकाम् |
डमड्डमड्डमड्डमन्निनाद वड्डमर्वयं, चकार चण्डताण्डवं तनोतु नः शिवः शिवम् ||1||

जटा कटा हसंभ्रम भ्रमन्निलिम्प निर्झरी, विलो लवी चिवल्लरी विराजमान मूर्धनि |
धगद् धगद् धगज्ज्वलल् ललाट पट्ट पावके किशोर चन्द्र शेखरे रतिः प्रतिक्षणं मम ||2||

धरा धरेन्द्र नंदिनी विलास बन्धु बन्धुरस् फुरद् दिगन्त सन्तति प्रमोद मानमानसे |
कृपा कटाक्ष धोरणी निरुद्ध दुर्धरापदि क्वचिद् दिगम्बरे मनो विनोदमेतु वस्तुनि ||3||

लता भुजङ्ग पिङ्गलस् फुरत्फणा मणिप्रभा कदम्ब कुङ्कुमद्रवप् रलिप्तदिग्व धूमुखे |
मदान्ध सिन्धुरस् फुरत् त्वगुत्तरीयमे दुरे मनो विनोद मद्भुतं बिभर्तु भूतभर्तरि ||4||

सहस्र लोचनप्रभृत्य शेष लेखशेखर प्रसून धूलिधोरणी विधूस राङ्घ्रि पीठभूः |
भुजङ्ग राजमालया निबद्ध जाटजूटक श्रियै चिराय जायतां चकोर बन्धुशेखरः ||5||

ललाट चत्वरज्वलद् धनञ्जयस्फुलिङ्गभा निपीत पञ्चसायकं नमन्निलिम्प नायकम् |
सुधा मयूखले खया विराजमानशेखरं महाकपालिसम्पदे शिरोज टालमस्तु नः ||6||

कराल भाल पट्टिका धगद् धगद् धगज्ज्वल द्धनञ्जयाहुती कृतप्रचण्ड पञ्चसायके |
धरा धरेन्द्र नन्दिनी कुचाग्र चित्रपत्रक प्रकल्प नैक शिल्पिनि त्रिलोचने रतिर्मम |||7||

नवीन मेघ मण्डली निरुद् धदुर् धरस्फुरत्- कुहू निशीथि नीतमः प्रबन्ध बद्ध कन्धरः |
निलिम्प निर्झरी धरस् तनोतु कृत्ति सिन्धुरः कला निधान बन्धुरः श्रियं जगद् धुरंधरः ||8||

प्रफुल्ल नीलपङ्कज प्रपञ्च कालिम प्रभा- वलम्बि कण्ठकन्दली रुचिप्रबद्ध कन्धरम् |
स्मरच्छिदं पुरच्छिदं भवच्छिदं मखच्छिदं गजच्छि दांध कच्छिदं तमंत कच्छिदं भजे ||9||

अखर्व सर्व मङ्गला कला कदंब मञ्जरी रस प्रवाह माधुरी विजृंभणा मधुव्रतम् |
स्मरान्तकं पुरान्तकं भवान्तकं मखान्तकं गजान्त कान्ध कान्त कं तमन्त कान्त कं भजे ||10||

जयत् वदभ्र विभ्रम भ्रमद् भुजङ्ग मश्वस – द्विनिर्ग मत् क्रमस्फुरत् कराल भाल हव्यवाट् |
धिमिद्धिमिद्धिमिध्वनन्मृदङ्गतुङ्गमङ्गल ध्वनिक्रमप्रवर्तित प्रचण्डताण्डवः शिवः ||11||

स्पृषद्विचित्रतल्पयोर्भुजङ्गमौक्तिकस्रजोर्- – गरिष्ठरत्नलोष्ठयोः सुहृद्विपक्षपक्षयोः |
तृष्णारविन्दचक्षुषोः प्रजामहीमहेन्द्रयोः समप्रवृत्तिकः ( समं प्रवर्तयन्मनः) कदा सदाशिवं भजे ||12||

कदा निलिम्पनिर्झरीनिकुञ्जकोटरे वसन् विमुक्तदुर्मतिः सदा शिरः स्थमञ्जलिं वहन् |
विमुक्तलोललोचनो ललामभाललग्नकः शिवेति मंत्रमुच्चरन् कदा सुखी भवाम्यहम् ||13||

इदम् हि नित्यमेवमुक्तमुत्तमोत्तमं स्तवं पठन्स्मरन्ब्रुवन्नरो विशुद्धिमेतिसंततम् |
हरे गुरौ सुभक्तिमाशु याति नान्यथा गतिं विमोहनं हि देहिनां सुशङ्करस्य चिंतनम् ||14||

पूजा वसान समये दशवक्त्र गीतं यः शंभु पूजन परं पठति प्रदोषे |
तस्य स्थिरां रथगजेन्द्र तुरङ्ग युक्तां लक्ष्मीं सदैव सुमुखिं प्रददाति शंभुः ||15||

इति श्रीरावण- कृतम् शिव- ताण्डव- स्तोत्रम् सम्पूर्णम्

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ॐ नमः शिवाय | om namah shivaya - Now Meaning in Hindi
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shiva





सघन जटामंडल रूप वन से प्रवाहित होकर श्री गंगाजी की धाराएँ जिन शिवजी के पवित्र कंठ प्रदेश को प्रक्षालित (धोती) करती हैं, और जिनके गले में लंबे-लंबे बड़े-बड़े सर्पों की मालाएँ लटक रही हैं तथा जो शिवजी डमरू को डम-डम बजाकर प्रचंड तांडव नृत्य करते हैं, वे शिवजी हमारा कल्याण करें।

अति अम्भीर कटाहरूप जटाओं में अतिवेग से विलासपूर्वक भ्रमण करती हुई देवनदी गंगाजी की चंचल लहरें जिन शिवजी के शीश पर लहरा रही हैं तथा जिनके मस्तक में अग्नि की प्रचंड ज्वालाएँ धधक कर प्रज्वलित हो रही हैं, ऐसे बाल चंद्रमा से विभूषित मस्तक वाले शिवजी में मेरा अनुराग (प्रेम) प्रतिक्षण बढ़ता रहे।

पर्वतराजसुता के विलासमय रमणीय कटाक्षों से परम आनंदित चित्त वाले (माहेश्वर) तथा जिनकी कृपादृष्टि से भक्तों की बड़ी से बड़ी विपत्तियाँ दूर हो जाती हैं, ऐसे (दिशा ही हैं वस्त्र जिसके) दिगम्बर शिवजी की आराधना में मेरा चित्त कब आनंदित होगा।

जटाओं में लिपटे सर्प के फण के मणियों के प्रकाशमान पीले प्रभा-समूह रूप केसर कांति से दिशा बंधुओं के मुखमंडल को चमकाने वाले, मतवाले, गजासुर के चर्मरूप उपरने से विभूषित, प्राणियों की रक्षा करने वाले शिवजी में मेरा मन विनोद को प्राप्त हो।

इंद्रादि समस्त देवताओं के सिर से सुसज्जित पुष्पों की धूलिराशि से धूसरित पादपृष्ठ वाले सर्पराजों की मालाओं से विभूषित जटा वाले प्रभु हमें चिरकाल के लिए सम्पदा दें। 5

इंद्रादि देवताओं का गर्व नाश करते हुए जिन शिवजी ने अपने विशाल मस्तक की अग्नि ज्वाला से कामदेव को भस्म कर दिया, वे अमृत किरणों वाले चंद्रमा की कांति तथा गंगाजी से सुशोभित जटा वाले, तेज रूप नर मुंडधारी शिवजीहमको अक्षय सम्पत्ति दें।

जलती हुई अपने मस्तक की भयंकर ज्वाला से प्रचंड कामदेव को भस्म करने वाले तथा पर्वत राजसुता के स्तन के अग्रभाग पर विविध भांति की चित्रकारी करने में अति चतुर त्रिलोचन में मेरी प्रीति अटल हो।

नवीन मेघों की घटाओं से परिपूर्ण अमावस्याओं की रात्रि के घने अंधकार की तरह अति गूढ़ कंठ वाले, देव नदी गंगा को धारण करने वाले, जगचर्म से सुशोभित, बालचंद्र की कलाओं के बोझ से विनम, जगत के बोझ को धारण करने वाले शिवजी हमको सब प्रकार की सम्पत्ति दें।

फूले हुए नीलकमल की फैली हुई सुंदर श्याम प्रभा से विभूषित कंठ की शोभा से उद्भासित कंधे वाले, कामदेव तथा त्रिपुरासुर के विनाशक, संसार के दुखों के काटने वाले, दक्षयज्ञविध्वंसक, गजासुरहंता, अंधकारसुरनाशक और मृत्यु के नष्ट करने वाले श्री शिवजी का मैं भजन करता हूँ।

कल्याणमय, नाश न होने वाली समस्त कलाओं की कलियों से बहते हुए रस की मधुरता का आस्वादन करने में भ्रमररूप, कामदेव को भस्म करने वाले, त्रिपुरासुर, विनाशक, संसार दुःखहारी, दक्षयज्ञविध्वंसक, गजासुर तथा अंधकासुर को मारनेवाले और यमराज के भी यमराज श्री शिवजी का मैं भजन करता हूँ।

अत्यंत शीघ्र वेगपूर्वक भ्रमण करते हुए सर्पों के फुफकार छोड़ने से क्रमशः ललाट में बढ़ी हुई प्रचंड अग्नि वाले मृदंग की धिम-धिम मंगलकारी उधा ध्वनि के क्रमारोह से चंड तांडव नृत्य में लीन होने वाले शिवजी सब भाँति से सुशोभित हो रहे हैं।

कड़े पत्थर और कोमल विचित्र शय्या में सर्प और मोतियों की मालाओं में मिट्टी के टुकड़ों और बहुमूल्य रत्नों में, शत्रु और मित्र में, तिनके और कमललोचननियों में, प्रजा और महाराजाधिकराजाओं के समान दृष्टि रखते हुए कब मैं शिवजी का भजन करूँगा।

कब मैं श्री गंगाजी के कछारकुंज में निवास करता हुआ, निष्कपटी होकर सिर पर अंजलि धारण किए हुए चंचल नेत्रों वाली ललनाओं में परम सुंदरी पार्वतीजी के मस्तक में अंकित शिव मंत्र उच्चारण करते हुए परम सुख को प्राप्त करूँगा।

देवांगनाओं के सिर में गूँथे पुष्पों की मालाओं के झड़ते हुए सुगंधमय पराग से मनोहर, परम शोभा के धाम महादेवजी के अंगों की सुंदरताएँ परमानंदयुक्त हमारेमन की प्रसन्नता को सर्वदा बढ़ाती रहें।

प्रचंड बड़वानल की भाँति पापों को भस्म करने में स्त्री स्वरूपिणी अणिमादिक अष्ट महासिद्धियों तथा चंचल नेत्रों वाली देवकन्याओं से शिव विवाह समय में गान की गई मंगलध्वनि सब मंत्रों में परमश्रेष्ठ शिव मंत्र से पूरित, सांसारिक दुःखों को नष्ट कर विजय पाएँ।

इस परम उत्तम शिवतांडव श्लोक को नित्य प्रति मुक्तकंठ सेपढ़ने से या श्रवण करने से संतति वगैरह से पूर्ण हरि और गुरु मेंभक्ति बनी रहती है। जिसकी दूसरी गति नहीं होती शिव की ही शरण में रहता है।

शिव पूजा के अंत में इस रावणकृत शिव तांडव स्तोत्र का प्रदोष समय में गान करने से या पढ़ने से लक्ष्मी स्थिर रहती है। रथ गज-घोड़े से सर्वदा युक्त रहता है।


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ॐ नमः शिवाय | om namah shivaya - Now in english
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Shiva



Jatatavee galajjala pravaha pavitasthale, Gale avalabhya lambithaam bhujanga tunga malikaam, Damaddamaddama ddama ninnadava damarvayam, Chakara chanda tandavam tanotu na shivh shivam. 1

Jata kataha sambhramabhramanillimpa nirjari, Vilola veechi vallari viraja mana moordhani, Dhaga dhaga dhaga jjwala lalata patta pavake, Kishora Chandra shekare ratih prati kshanam mama. 2

Dhara dharendra nandini vilasa bhandhu bhandura, Sphuradriganta santati pramoda mana manase, Kripa kataksha dhorani niruddha durdharapadi, Kwachi digambare mano vinodametu vastuni. 3

Jata bhujanga pingala sphurat phana mani prabha, Kadamba kumkuma drava pralipta digwadhu mukhe, Madhandha sindhura sphuratwagu uttariyamedure, Manovinodamadbhutam bibhartu bhoota bhartari. 4

Lalata chatwara jwaladdhanam jaya sphulingaya, Nipeeta pancha sayakam namannilimpanayakam, Sudha mayookha lekhaya virajamana shekharam, Maha kapali sampade, sirijjatalamastunah. 5

Sahastralochana prabhrityashesha lekha shekhara, Prasoona dhooli dhorani vidhu saranghripeethabhuh, Bhujangaraja Malaya nibaddha jaata jootakah, Shriyai chiraya jayatam chakora bandhu shekharah. 6

Karala bhala pattika dhagaddhadhagaddha gajjwala, Ddhananjayahuti kruta prachanda panchasayake , Dharadharendra nandini kuchagra chithrapathraka, Prakalpanaikashilpini, trilochane ratirmama. 7

Naveena megha mandali niruddha durdharatsphurat, Kuhuh nisheethineetamah prabhandha baddha kandharah, Nilimpa nirjhari dharastanotu krutti sundarah, Kalanidhana bandhurah shriyam jagat durandharah. 8

Prafulla neela pankaja prapancha kalimaprabha, Valambi kantha kandali ruchi prabandha kandharam, Smarchchhidam purachchhidam bhavachchhidam makhachchhidam, Gajachchhidandha kachchhidam tamant kachchhidam bhaje. 9

Akharva sarva mangalaa kalaa kadamba manjari, Rasa pravaha madhuri vijrumbhane madhuvritam, Smrantakam, purantakam, bhavantakam, makhantakam, Gajantakandhakantakam tamantakantakam bhaje. 10

Jayatwadabhra vibhrama bhramadbujanga mashwasad, Vinirgamat, kramasphurat, karala bhala havya vaat, Dhimiddhimiddhimi maddhwanan mridanga tunga mangala, Dhwani krama pravartitah prachanda tandawah shivah. 11

Drushadwichitra talpayor bhujanga mauktikastrajor, Garishtha ratna loshtayoh suhrid wipaksha pakshayoh, Trinara vinda chakshushoh praja mahee mahendrayoh, Samapravrittikah katha sadashivam bhajamyaham. 12

Kada nilimpa nirjharee nikunja kotare vasan, Vimukta durmatih sada shirahstha manjali vahan, Vilola lola lochane lalama bhala lagnakah, Shiveti mantra muchcharan kada sukhee bhavamyaham. 13

Nilimpnath naagaree kadamb mauli mallika, nigumpha nirbharkshanm dhooshnika manoharah. tanotu no manomudam vinodineem maharshinam, parshriyam param padam tadanjatvisham chayah.14

prachanda wadavaanal prabha shubh pracharinee, mahaasht siddhi kaaminee janavahoot jalpana. vimukta vaam lochano vivaah kaalikdhvanih, shiveti mantra bhooshano jagajjayaay jaaytaam.15

Imam hi nitya meva mukta muttamottamstavam, Pathantaram bhunannaro vishuddhmeti santatam, Hare Gurau sa bhaktimashu yati nanyatha gati, Vimohanam hi dehinaa tu shankarasya chitanam. 16

Poojavasana samaye dasha vaktra geetam, Yah shambhu poojana param pathati pradoshe, Tasyasthiraam ratha gajendra turanga yuktaam, Lakshmeem sadaiva sumukheem pradadaati shambuh. 17

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ॐ नमः शिवाय | om namah shivaya | Now Meaning in english
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shiva





That Shiva, Who have long-garlands of the snake king (cobra) at the neck which is purified by the flow of trickling water-drops in the forest-like twisted hair-locks, Who danced the fierce Tandava-dance to the music of a sounding-drum, — may bless us

At every moment, may I find pleasure in Shiva, Whose head is situated in between the creeper-like unsteady waves of Nilimpanirjhari (Ganga), in whose head unsteadily fire (energy) is fuming the like twisted hair-locks, Who has crackling and blazing fire at the surface of forehead, and Who has a crescent-moon (young moon) at the forehead

May my mind seeks happiness in Shiva, Whose mind has the shining universe and all the living-beings inside, Who is the charming sportive-friend of the daughter of the mountain-king of the Earth ( Himalaya's daughter parvati), Whose uninterrupted series of merciful-glances conceals immense-troubles, and Who has direction as His clothes

May my mind hold in Shiva, by Whom — with the light from the jewels of the shining-hoods of creeper-like yellow-snakes — the face of Dikkanyas’ are smeared with Kadamba-juice like red Kuńkuma, Who looks dense due to the glittering skin-garment of an intoxicated elephant, and Who is the Lord of the ghosts

For a long time, may Shiva — Whose foot-basement is grey due to the series of pollen dust from flowers at the head of Indra (Sahasralocana) and all other demi-gods, Whose matted hairlocks are tied by a garland of the king of snakes, and Who has a head-jewel of the friend of cakora bird — produce prosperity

May we acquire the possession of tress-locks of shiva, Which absorbed the five-arrows (of Kaamadeva) in the sparks of the blazing fire stored in the rectangular-forehead, Which are being bowed by the leader of supernatural-beings, Which have an enticing-forehead with a beautiful streak of crescent-moon

May I find pleasure in Trilocana, Who offered the five great-arrows (of Kamadeva) to the blazing and chattering fire of the plate-like forehead, and Who is the sole-artist placing variegated artistic lines on the breasts of the daughter of Himalaya ( Parvati)

May Shiva — Whose cord-tied neck is dark like a night with shining-moon obstructed by a group of harsh and new clouds, Who holds the River Ganga, Whose cloth is made of elephant-skin, Who has a curved and crescent moon placed at the forehead, and Who bears the universe — expand [my] wealth.

I adore Shiva, Who supports the dark glow of blooming blue lotus series at around the girdle of His neck, Who cuts-off Smara (Kamadeva), Who cuts-off Pura, Who cuts-off the mundane existence, Who cuts-off the sacrifice (of Daksa), Who cuts-off the demon Gaja, Who cuts-off Andhaka, and Who cuts-off Yama (death).

I adore Shiva, Who only eats the sweet-flow of nectar from the beautiful flowers of Kadamba-trees which are the abode of all important auspicious qualities, Who destroys Smara (Kamadeva), Who destroys Pura, Who destroys the mundane existence, Who destroys the sacrifice (of Dakṣa), Who destroys the demon Gaja, Who destroys Andhaka, and Who destroys Yama (death).

May Shiva, Whose dreadful forehead has oblations of plentiful, turbulent and wandering snake-hisses — first coming out and then sparking, Whose fierce tandava-dance is set in motion by the sound-series of the auspicious and best-drum (damaru) — which is sounding with ‘dhimit-dhimit’ sounds, be victorious.

When will I adore Sada Shiva with an equal vision towards varied ways of the world, a snake or a pearl-garland, royal-gems or a lump of dirt, friend or enemy sides, a grass-eyed or a lotus-eyed person, and common men or the king.

Living in the hollow of a tree in the thickets of River Ganga, always free from ill-thinking, bearing anjali at the forehead, free from lustful eyes, and forehead and head bonded, when will I become content while reciting the mantra ‘‘Shiva?’’

Divine beauty of different parts of Lord Shiv which are enlighted by fragrence of the flowers decorating the twisted hairlocks of angles may always bless us with happiness and pleasure.

The Shakti (energy) which is capable of burning all the sins and spreading welfare of all and the pleasent sound produced by angles during enchanting the pious Shiv mantra at the time of Shiv-Parvati Vivah may winover & destroy all the sufferings of the world.

Reading, remembering, and reciting this eternal, having spoken thus, and the best among best eulogy indeed incessantly leads to purity. In preceptor Hara (Shiva) immediately the state of complete devotion is achieved; no other option is there. Just the thought of Shiva (Shankara) is enough for the people.

At the time of prayer-completion, that who reads this song by Dasavaktra (Ravana) after the prayer of Sambhu — Sambhu gives him stable wealth including chariots, elephants and horses, and beautiful face.









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